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"गाँधी" के सपनो का भारत -- शिव जांगिड


भारत भूमि 

एक नयी उम्मीद का भारत ,
"गाँधी" के सपनो का भारत !


मन में जागा नया सवेरा  ,
सपनो का हुआ नया बसेरा
गूंज उठी तमन्ना दिल की , 
दिखने लगे कुछ नए रास्ते  ,
 देख रही आंखे नया सपना  ,
उम्मीदों ने किया  पैर पसेरा ,
अन्ना  ने दिया ये स्वप्न मुझको ,
नहीं मुझे इसे खोना है.
चाहे कुछ भी हो भले अब ,लोक जनपाल ही अपना  डेरा है .

Comments :

2 टिप्पणियाँ to “"गाँधी" के सपनो का भारत -- शिव जांगिड”

सुंदर कविताएं।

सुंदर कविताएं।