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स्वार्थ के आगे मजबूर जनता -- शिव जांगिड

कभी तालाब के भराव पेटे के खेत रह चुके स्थान को लालचवश स्वार्थी लोगो ने कूटनीति पूर्वक बेच तो दिया और मकान भी बना लिए गए लेकिन प्रकृति को कोई चुनोती नहीं दे सकता खाली पड़े प्लाटो में भरा पानी और बंगलो में सीलन इन सबको मुह चिड़ा रही हे क्योकि इस जगह पर गुन्दोलाव झील की चादर चलने पर भरपूर पानी भरा रहता था ये बात खरीदने वालो को नहीं तो बेचने वालो को और इनको रिहायशी कालोनी में परिवर्तित करने वाले प्रसाशन को पता नहीं हो ये बात गले नहीं उतरती इससे भी इन्हें सबक नहीं मिल रहा झील को और भी मलवा भर के पाटा जा रहा हे नक़्शे से झील को धीरे धीरे गायब किया जा रहा हे और जनता का ध्यान दूसरी तरफ करने के लिए तरह तरह के नाटक किये जा रहे हे !
 

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