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महाराजाधिराज महाराजा श्री सुमेर सिंह :-शिव जांगिड

हिज हाई नेस उम्दाये राज हाय बुलंद मकान
 महाराजाधिराज महाराजा श्री सुमेर सिंह 
हिज हाई नेस उम्दाये राज हाय बुलंद मकान
                       महाराजाधिराज महाराजा श्री सुमेर सिंह

अर्थ प्रधान इस नगरी में आज कौन याद करता हे उस महान आत्मा को जिसका जन्म विक्रम संवत १७५६ पौष सुदी द्वादसी को हुआ था, अपने जीवन काल में राजनितिक कलह होते हुए भी इन्होने इस किशनगढ़ नगर को ही नहीं वरन मानव समाज को जो कुछ दिया वो अतुलनीय हे! इन्होने कृष्ण भक्ति से ओत-प्रोत लगभग २६५ काव्य ग्रंथो की रचना की, हिंदी के आलावा फारसी में भी इनका काव्य हे, किशनगढ़ की चित्रकला शेली को इनके बनाये चित्रों ने विश्व स्तरीय पहचान दी, बनी ठनी इनके समय ही जिवंत थी, किशनगढ़ का आम ख़ास, फूल महल और रूपनगढ़ का पक्का परकोटा इनके समय में ही बनाया गया, विक्रम संवत १८२१ भादवा सुदी पंचमी को वृन्दावन में इनका देवलोक गमन हुआ और नागरी दास की छत्री के नाम से वही पर इनका सुन्दर स्मारक बना हुआ हे!

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